bijay-sir
बिजय कुमार जैन
‘हिन्दी सेवी’
वरिष्ठ पत्रकार व सम्पादक
भ्रमणध्वनि: ९३२२३०७९०८
अणुडाक: mailgaylordgroup@gmail.com

भारतीय भाषा अपनाओ अभियान भारत की एक राष्ट्रभाषा बनें हम पत्रकारों का है ये आव्हान

‘हिंदी वेलफेअर ट्रस्ट’ के संस्थापक अध्यक्ष बिजय कुमार जैन विगत ३६ वर्षों से हिंदी पत्रकारिता के माध्यम से देश, धर्म, समाज एवं राजनीति की सेवा में संलग्न है। श्री जैन ने अपनी पत्रकारिता की यात्रा ‘विडियो बूम’ के साथ ‘ईस्ट वेस्ट अंधेरी टाइम्स’ के प्रकाशन – संपादन से आरंभ की, वर्तमान में भी तीन-तीन पत्रिकाओं का संपादन कर रहे हैं।

भारत की आजादी को ७० वर्ष बीत रहे हैं, परंतु भारत की आज तक कोई राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई जिसके लिए मुझे स्वयं पर नाराजगी भी हो रही है कि बिजय! तुम्हारे रहते हुए भारत राष्ट्रभाषाविहिन क्यों है? मेरे आदर्श महात्मा गांधी ‘बापू’ कहा करते थे कि जिस राष्ट्र की कोई राष्ट्रभाषा नहीं होती, वो राष्ट्र गूंगा होता है।

‘हिंदी’ को मिले राष्ट्रभाषा का सम्मान हेतु बिजय जैन के निर्देशन में देश के प्रमुख शहरों जैसे मुम्बई, कोलकाता, दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, हैदराबाद,
चेन्नई, चण्डीगढ़, भुवनेश्वर, गुवाहाटी आदि में सभाएं आयोजित की गयी जिसमें बड़ी संख्या में हिन्दी साहित्यकार, भाषा प्रेमी एवं पत्रकारों ने भारी संख्या
में हिस्सा भी लिया, मिडिया के वरिष्ठ व्यक्तित्वों से उत्साहजनक प्रतिक्रियाएँ भी मिली, सब का मत रहा कि ‘हिंदी’ भाषा को ‘राष्ट्रभाषा’ का संवैधानिक मान्यता दिलाने के संकल्प पर समस्त मिडिया को एकमंच पर आना स्वागत योग्य और ऐतिहासिक घटना होगी। अपने प्रयास को जारी रखते हुए श्री जैन ३० जनवरी २०१७ को महात्मा गांधीजी की पुण्यतिथि पर दिल्ली स्थित राजघाट से भारत सरकार को एक निवेदन भी दिया कि भारत की राष्ट्रभाषा ‘हिंदी’ को संवैधानिक सम्मान दिया जाये, भारत के राष्ट्रपति, राज्यों के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, सम्पादक, पत्रकार, भाषाविद एवं साहित्यकारों का समर्थन भी मिला, ये कारवां यहीं नहीं रूका, इसके बाद भी हिंदी बने राष्ट्रभाषा अभियान की सफलता के लिए ५ जनवरी २०१७ को तेरापंथ भवन भुवनेश्वर, १२ जनवरी २०१७ को हिंदी साहित्य सम्मेलन कार्यालय नई दिल्ली, १९ जनवरी २०१७ को असम राष्ट्रभाषा प्रचार समिति गुवाहाटी, २२ जनवरी २०१७ को प्रेस क्लब पृष्ठ चण्डीगढ़, ३० जनवरी २०१७ को राजघाट में ली शपथ, ६ फरवरी २०१७ को मुंबई महानगर पालिका दादर, ४ मार्च २०१७ को बगड़का कॉलेज मुंबई, १६ मार्च २०१७ को साठे कॉलेज विलेपार्ले, २३ मार्च २०१७ को मारवाड़ी सार्वजनिक पुस्तकालय नई दिल्ली, १४ मई २०१७ को प्रेस क्लब रायपुर, १८ जून २०१७ को कुंद-कुंद ज्ञानपीठ इंदौर , २६ से ३० सितम्बर को मुंबई में प्रथम बार २४ भारतीय भाषाओं का विश्वस्तरीय ‘भारतीय भाषाई पुस्तक मेला’ का आयोजन किया, जिसका उद्घाटन गोवा की राज्यपाल महामहीम श्रीमती मृदुला सिन्हा द्वारा किया गया, दिनांक ६ जनवरी २०१८ को भाषायी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन कोलकात्ता में श्री जैन की भावना ‘पहले मातृभाषा-फिर राष्ट्रभाषा’ को न सुनते हुए मंच तक से उतरने की जिल्लत भी सहन करनी पड़ी। कहते हैं इन्सान में जुनून होना चाहिए सफलता कदमों को चूमती है, १०-११ जनवरी २०१८ को मुंबई विद्यापीङ्ग में २२ भाषाओं की संस्कृति को एकमंच पर लाकर ‘भारतीय भाषाई सम्मेलन’ का आयोजन किया, जिसका उद्घाटन नागालैण्ड के राज्यपाल श्री पी.बी. आचार्य ने किया और कहा कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान बढ़े, इस भावना का मैं तहे दिल से बिजय जी का सम्मान करता हूँ। ‘राजस्थानी एकता’ के लिए २९-३१ मार्च व १ अप्रैल २०१८ को मुंबई स्थित मुंबई की पुरातन राजस्थानी नगरी में ४ दिवसीय राजस्थानी मेला का आयोजन कर डाला, जिसमें मुंबई-महाराष्ट्र व पूरे भारत से लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवायी। अपने जीवन काल में संघर्षरत श्री जैन ने कई उतार-चढ़ाव देखे, सड़क पर खड़े होकर अखबार बेचा तो कई-कई राजनैतिक-उद्योगपति गुरू-शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े विभूतियों के साक्षात्कार किया तो फिल्मी दुनिया के बीग बी अमिताभ बच्चन के साक्षात्कार से पत्रकारिता की दुनिया में प्रवेश किया, साथ ही सामाजिक व राष्ट्रीय हित में कई-कई ऐसे कार्य भी किए जो कि अपने आप में अद्वितीय हैं। आज बिजय कुमार जैन ने अपने जीवन का एक ही ध्येय बना लिया है कि विश्व में फैले बंटे हुए जैन समाज को अपनी अंतराष्ट्रीय ख्यात पत्रिका ‘जिनागम’ व सभाओं द्वारा एकमंच पर लाने का प्रयास, उद्योगपतियों व संस्कृती प्रेमियों को एकमंच पर लाने के लिए ‘आपणों राजस्थान’ द्वारा ‘राजस्थानी’ से परिचय करवाना, जबकि राजस्थानी आज अपनी संस्कृति का भूलते जा रहे हैं। बिजय कुमार जैन द्वारा सम्पादित ‘मेरा राजस्थान’ पत्रिका द्वारा राजस्थान के कई-कई गावों-शहरों के इतिहास से परिचित करवाना, अद्वितीय ही नहीं किए जा रहे ऐतिहासिक कार्य को सम्मानित भी किया जा रहा है भारतीय राजनीतिज्ञों को स्वच्छता से ओत-प्रोत ‘मैं भारत हूँ’ का प्रकाशन कर भारत की शीर्ष राजनीतियों से निवेदन करते हुए कहते रहे हैं कि गन्दी राजनीति को दूर कर भारत का सम्मान विश््व में बढवायें। बिजय कुमार जैन देश-विदेश में फैले भारतीयों से निवेदन कर रहे हैं कि ‘पहले मातृभाषा-फिर राष्ट्रभाषा’ भारत के हर प्रांतों की भाषा को राज्यभाषा का दर्ज़ा व हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान प्राप्त हो, जिसके लिए श्री जैन ने भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद लोकसभा-राज्यसभा आदि सभी से निवेदन कर चुके हैं कि भारतीय भाषायी संस्कृति को बचायें और दिल्ली स्थित INDIA GATE को ‘भारत द्वार’ लिखवायें। राष्ट्रीय संस्कृति से परिपूर्ण और भारतीय भाषाओं को सम्मान दिलाने को अग्रणीय श्री जैन का ‘ईस्ट वेस्ट अंधेरी टाइम्स, ‘जिनागम’, ‘मेरा राजस्थान’, ‘मैं भारत हूँ,’ आपणों राजस्थान, हिंदीकल्याणन्यास.कॉम, ‘जिनागम फाउंडेशन’ परिवार को मार्गदर्शन मिलता रहे ऐसी परिकल्पना हम नीली छतरी वाले से करते हैं

भारतीय संस्कृति की संरक्षक ‘हिंदी’ राष्ट्रभाषा बने

मेरे राष्ट्र की जुबान ‘हिंदी’ बने, ये मेरा संकल्प है, मेरे ‘बापू’ राष्ट्रपिता गांधीजी की अधूरी इच्छा हिंदी बने राष्ट्रभाषा’ को पूरी करके रहूँगा, यही मेरे जीवन का ध्येय है।

मैं चाहता हूँ कि हर प्रांतों की जो अपनी भाषा है, वह उस राज्य की राज्यभाषा व राष्ट्र की राष्ट्रभाषा ‘हिंदी’ घोषित हो, जिसके लिए ३० जनवरी २०१७ को मेरे प्रिय ‘बापू’ की पूण्य तिथि पर उनके समाधिस्थल से भारत सरकार को निवेदन करना चाहता हूँ कि भारत की राष्ट्रभाषा संवैधानिक तौर पर ‘हिंदी’ बने।

‘हिंदी’ राष्ट्रभाषा अभियान की सफलता के लिए विश्वभर की सभी भारतीय भाषाओं का एकमंच बनाने का प्रयास भी कर रहा हूँ जिसके लिए आप सभी भारतीय भाषाई मंच ‘सरकारी-गैर-सरकारी’ के मार्गदर्शन की जरूरत है, आइये! हम सभी मिलकर पूर्ण राष्ट्र के सपने को साकार करें।