‘क्यूं नहीं मिल्यो म्हारी मायड़ भाषा न सम्मान’

आठवीं अनुसुची में राजस्थानी भाषा को सम्मान दिलाने के लिए बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

राजस्थानी भाषा

‘क्यूं नहीं मिल्यो म्हारी मायड़ भाषा न सम्मान’
राजस्थानी भाषा सम्मान यात्रा का सफलतम आयोजन

राजस्थानी भाषा को राज्यभाषा का सम्मान दिलाने के उद्देश्य से श्री जैन ने १९ जुलाई, २०१५ को मुंबई से दिल्ली तक रथयात्रा का आयोजन किया, कई दृष्टियों से यह रथयात्रा ऐतिहासिक साबित हुई जो १७ दिनों तक महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, नयी दिल्ली आदि का दौरा किया, जिसे सभी राजनैतिक दलों के साथ सभी भाषाविदों ने सराहा।

एकला चलो रे कारवॉ बनता जायेगा – रविन्द्रनाथ टैगोर

अपने साढ़े तीन दशक के पत्रकारीता जीवन में श्री बिजय कुमार जैन ने एक बात बड़ी गंभीरता से अनुभव किया कि विदेशी दासता से मुक्त होने के ७० वर्षों के बाद भी भारत की अपनी कोई संवैधानिक राष्ट्रभाषा नहीं है। श्री जैन का दृढ़ मत है कि ‘हिंदी’ ही भारत की सर्वमान्य राष्ट्रभाषा होने की अधिकरिणी है और इस नाते ‘हिंदी’ को संवैधानिक रूप से  राष्ट्रभाषा  की  मान्यता मिलनी ही चाहिए, स्वयं एक पत्रकार व सम्पादक व पर्यावरण विद होने के नाते श्री जैन ने अनुभव किया कि यह कार्य जन-जागरण से ही संभव हो सकता है और इसके लिए समाचार जगत (मीडिया) के समस्त रूपों का सहयोग लेकर ‘हिंदी’ को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने का प्रयास कर रहे हैं सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान बढ़ाते हुए। वर्तमान में मीडिया के तीन महत्वपूर्ण प्रकारों प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया को जोड़ने की भावना से श्री जैन ने जनजागरण अभियान को सूत्रवाक्य दिया.

राजस्थानी भाषा मान्यता यात्रा २०१५

बिजय कुमार जैन द्वारा भारतीय भाषा अपनाओ अभियान के लिये ली गयी सभाएं
पहली सभा
दूसरी सभा
तीसरी सभा
चौथी सभा
पांचवीं सभा
छठवीं सभा
सातवीं सभा भोपाल
आठवीं सभा हैदराबाद
नवीं सभा चैन्नई
दसवीं सभा भुवनेश्वर
ग्यारहवीं सभा
बारहवीं सभा
तेरहवीं सभा
चौदहवीं सभा
पंद्रहवीं सभा
सोलहवीं सभा